सूरह 15 अल्-ह़िज्र, आयत 60 – 77

  1. إِلَّا امْرَأَتَهُ قَدَّرْنَا ۙ إِنَّهَا لَمِنَ الْغَابِرِينَ

    परंतु लूत की पत्नी, हमने नियत कर दिया है कि निःसंदेह वह निश्चय ही पीछे रह जाने वालों में से है।

    15:60
  2. فَلَمَّا جَاءَ آلَ لُوطٍ الْمُرْسَلُونَ

    फिर जब लूत के घर वालों के पास भेजे हुए (फ़रिश्ते) आए।

    15:61
  3. قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌ مُنْكَرُونَ

    तो उस (लूत अलैहिस्सलाम) ने कहा : तुम तो अपरिचित लोग हो।

    15:62
  4. قَالُوا بَلْ جِئْنَاكَ بِمَا كَانُوا فِيهِ يَمْتَرُونَ

    उन्होंने कहा : (डरो नहीं) बल्कि हम तुम्हारे पास वह चीज़ लेकर आए हैं, जिसमें वे संदेह किया करते थे।

    15:63
  5. وَأَتَيْنَاكَ بِالْحَقِّ وَإِنَّا لَصَادِقُونَ

    और हम तुम्हारे पास सत्य लेकर आए हैं और निःसंदेह हम निश्चय सच्चे हैं।

    15:64
  6. فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِنَ اللَّيْلِ وَاتَّبِعْ أَدْبَارَهُمْ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنْكُمْ أَحَدٌ وَامْضُوا حَيْثُ تُؤْمَرُونَ

    अतः तुम अपने घर वालों को लेकर रात के किसी हिस्से में निकल जाओ और खुद उनके पीछे-पीछे चलो। और तुममें से कोई मुड़कर न देखे। तथा चले जाओ, जहाँ तुम्हें आदेश दिया जाता है।

    15:65
  7. وَقَضَيْنَا إِلَيْهِ ذَٰلِكَ الْأَمْرَ أَنَّ دَابِرَ هَٰؤُلَاءِ مَقْطُوعٌ مُصْبِحِينَ

    और हमने उसकी ओर इस बात की वह़्य कर दी कि इन लोगों की जड़ सुबह होते ही काट दी जाने वाली है।

    15:66
  8. وَجَاءَ أَهْلُ الْمَدِينَةِ يَسْتَبْشِرُونَ

    और उस नगर वाले इस हाल में आए कि बहुत खुश हो रहे थे।

    15:67
  9. قَالَ إِنَّ هَٰؤُلَاءِ ضَيْفِي فَلَا تَفْضَحُونِ

    उस (लूत अलैहिस्सलाम) ने कहा : ये लोग तो मेरे अतिथि हैं। अतः मुझे अपमानित न करो।

    15:68
  10. وَاتَّقُوا اللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ

    तथा अल्लाह से डरो और मुझे अपमानित न करो।

    15:69
  11. قَالُوا أَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ الْعَالَمِينَ

    उन्होंने कहा : क्या हमने तुम्हें विश्व वासियों (को अतिथि बनाने) से मना नहीं किया?

    15:70
  12. قَالَ هَٰؤُلَاءِ بَنَاتِي إِنْ كُنْتُمْ فَاعِلِينَ

    उस (लूत अलैहिस्सलाम) ने कहा : ये मेरी बेटियाँ हैं, यदि तुम कुछ करने वाले हो।

    15:71
  13. لَعَمْرُكَ إِنَّهُمْ لَفِي سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُونَ

    ऐ नबी! आपकी आयु की क़सम! निःसंदेह वे निश्चय अपनी मस्ती में भटके फिरते थे।

    15:72
  14. فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُشْرِقِينَ

    अंततः सूर्योदय के समय ही चिंघाड़ ने उन्हें पकड़ लिया।

    15:73
  15. فَجَعَلْنَا عَالِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِنْ سِجِّيلٍ

    फिर हमने उस बस्ती के ऊपरी भाग को नीचे कर दिया और उनपर कंकड़ के पत्थर बरसाए।

    15:74
  16. إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِلْمُتَوَسِّمِينَ

    निःसंदेह इसमें सोच-विचार करने वालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं।

    15:75
  17. وَإِنَّهَا لَبِسَبِيلٍ مُقِيمٍ

    और निःसंदेह वह (बस्ती) एक सार्वजनिक मार्ग पर स्थित है।

    15:76
  18. إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لِلْمُؤْمِنِينَ

    निःसंदेह इसमें ईमान वलों के लिए निश्चय बड़ी निशानी है।

    15:77

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी