सूरह 15 अल्-ह़िज्र, आयत 45 – 48

  1. إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ

    निःसंदेह आज्ञाकारी लोग जन्नतों तथा स्रोतों में होंगे।

    15:45
  2. ادْخُلُوهَا بِسَلَامٍ آمِنِينَ

    (उनसे कहा जाएगा :) इसमें सलामती के साथ निर्भय होकर प्रवेश कर जाओ।

    15:46
  3. وَنَزَعْنَا مَا فِي صُدُورِهِمْ مِنْ غِلٍّ إِخْوَانًا عَلَىٰ سُرُرٍ مُتَقَابِلِينَ

    और हम निकाल देंगे उनके दिलों में जो कुछ द्वेष होगा। वे भाई-भाई होकर एक-दूसरे के आमने-सामने तख़्तों पर (बैठे) होंगे।

    15:47
  4. لَا يَمَسُّهُمْ فِيهَا نَصَبٌ وَمَا هُمْ مِنْهَا بِمُخْرَجِينَ

    न उसमें उन्हें कोई थकान होगी और न वे वहाँ से निकाले जाएँगे।

    15:48

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी