सूरह 15 अल्-ह़िज्र, आयत 45 – 48
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إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ
निःसंदेह आज्ञाकारी लोग जन्नतों तथा स्रोतों में होंगे।
15:45 -
ادْخُلُوهَا بِسَلَامٍ آمِنِينَ
(उनसे कहा जाएगा :) इसमें सलामती के साथ निर्भय होकर प्रवेश कर जाओ।
15:46 -
وَنَزَعْنَا مَا فِي صُدُورِهِمْ مِنْ غِلٍّ إِخْوَانًا عَلَىٰ سُرُرٍ مُتَقَابِلِينَ
और हम निकाल देंगे उनके दिलों में जो कुछ द्वेष होगा। वे भाई-भाई होकर एक-दूसरे के आमने-सामने तख़्तों पर (बैठे) होंगे।
15:47 -
لَا يَمَسُّهُمْ فِيهَا نَصَبٌ وَمَا هُمْ مِنْهَا بِمُخْرَجِينَ
न उसमें उन्हें कोई थकान होगी और न वे वहाँ से निकाले जाएँगे।
15:48
अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी