सूरह 11 हूद, आयत 96 – 99

  1. وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا وَسُلْطَانٍ مُبِينٍ

    और हमने मूसा को अपनी निशानियों (चमत्कार) तथा स्पष्ट प्रमाण के साथ भेजा।

    11:96
  2. إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ فَاتَّبَعُوا أَمْرَ فِرْعَوْنَ ۖ وَمَا أَمْرُ فِرْعَوْنَ بِرَشِيدٍ

    फ़िरऔन और उसके प्रमुखों की ओर। तो उन्होंने फ़िरऔन के आदेश का पालन किया। जबकि फ़िरऔन का आदेश सटीक नहीं था।

    11:97
  3. يَقْدُمُ قَوْمَهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فَأَوْرَدَهُمُ النَّارَ ۖ وَبِئْسَ الْوِرْدُ الْمَوْرُودُ

    वह क़ियामत के दिन अपनी जाति के आगे-आगे चलेगा और उनको नरक में उतारेगा और वह क्या ही बुरा उतरने का स्थान है!

    11:98
  4. وَأُتْبِعُوا فِي هَٰذِهِ لَعْنَةً وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ بِئْسَ الرِّفْدُ الْمَرْفُودُ

    और इस दुनिया में उनके पीछे लानत (धिक्कार) लगा दी गई और क़ियामत के दिन भी। कैसा बुरा पुरस्कार है, जो उन्हें दिया जाएगा!

    11:99

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी