सूरह 10 यूनुस, आयत 75 – 92

  1. ثُمَّ بَعَثْنَا مِنْ بَعْدِهِمْ مُوسَىٰ وَهَارُونَ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِ بِآيَاتِنَا فَاسْتَكْبَرُوا وَكَانُوا قَوْمًا مُجْرِمِينَ

    फिर उनके बाद हमने मूसा और हारून को अपनी निशानियों के साथ फ़िरऔन और उसके सरदारों के पास भेजा, तो उन्होंने बहुत घमंड किया और वे अपराधी लोग थे।

    10:75
  2. فَلَمَّا جَاءَهُمُ الْحَقُّ مِنْ عِنْدِنَا قَالُوا إِنَّ هَٰذَا لَسِحْرٌ مُبِينٌ

    अतः जब उनके पास हमारी ओर से सत्य आया, तो उन्होंने कहा कि : नि:संदेह यह तो खुला जादू है।

    10:76
  3. قَالَ مُوسَىٰ أَتَقُولُونَ لِلْحَقِّ لَمَّا جَاءَكُمْ ۖ أَسِحْرٌ هَٰذَا وَلَا يُفْلِحُ السَّاحِرُونَ

    मूसा (अलैहिस्सलाम) ने कहा : क्या तुम सत्य के बारे में (ऐसा) कहते हो, जब वह तुम्हारे पास आया? क्या जादू है यह? हालाँकि, जादूगर सफल नहीं होते।

    10:77
  4. قَالُوا أَجِئْتَنَا لِتَلْفِتَنَا عَمَّا وَجَدْنَا عَلَيْهِ آبَاءَنَا وَتَكُونَ لَكُمَا الْكِبْرِيَاءُ فِي الْأَرْضِ وَمَا نَحْنُ لَكُمَا بِمُؤْمِنِينَ

    उन्होंने कहा : क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि हमको उस मार्ग से फेर दे जिसपर हमने अपने बाप-दादा को पाया है और इस देश में तुम दोनों की बड़ाई स्थापित हो जाए? और हम तुम दोनों को बिलकुल मानने वाले नहीं।

    10:78
  5. وَقَالَ فِرْعَوْنُ ائْتُونِي بِكُلِّ سَاحِرٍ عَلِيمٍ

    और फ़िरऔन ने कहा : हर कुशल जादूगर को मेरे पास लेकर आओ।

    10:79
  6. فَلَمَّا جَاءَ السَّحَرَةُ قَالَ لَهُمْ مُوسَىٰ أَلْقُوا مَا أَنْتُمْ مُلْقُونَ

    फिर जब जादूगर आ गए, तो मूसा ने उनसे कहा : जो कुछ तुम फेंकने वाले हो, फेंको।

    10:80
  7. فَلَمَّا أَلْقَوْا قَالَ مُوسَىٰ مَا جِئْتُمْ بِهِ السِّحْرُ ۖ إِنَّ اللَّهَ سَيُبْطِلُهُ ۖ إِنَّ اللَّهَ لَا يُصْلِحُ عَمَلَ الْمُفْسِدِينَ

    फिर जब उन्होंने फेंक दिया, तो मूसा ने कहा : तुम जो कुछ लाए हो, वह तो जादू है। निश्चय ही अल्लाह उसे शीघ्र ही निष्फल कर देगा। निःसंदेह अल्लाह बिगाड़ पैदा करने वालों का काम बनने नहीं देता।

    10:81
  8. وَيُحِقُّ اللَّهُ الْحَقَّ بِكَلِمَاتِهِ وَلَوْ كَرِهَ الْمُجْرِمُونَ

    और अल्लाह सत्य को, अपने शब्दों से, सत्य कर दिखाता है, यद्यपि अपराधियों को बुरा लगे।

    10:82
  9. فَمَا آمَنَ لِمُوسَىٰ إِلَّا ذُرِّيَّةٌ مِنْ قَوْمِهِ عَلَىٰ خَوْفٍ مِنْ فِرْعَوْنَ وَمَلَئِهِمْ أَنْ يَفْتِنَهُمْ ۚ وَإِنَّ فِرْعَوْنَ لَعَالٍ فِي الْأَرْضِ وَإِنَّهُ لَمِنَ الْمُسْرِفِينَ

    चुनाँचे मूसा पर उसकी जाति के कुछ युवाओं के सिवा कोई ईमान न लाया, (वह भी) फ़िरऔन और उनके सरदारों से डरते हुए कि कहीं वे उन्हें आज़माइश में न डाल दें। और निःसंदेह फ़िरऔन का धरती में बड़ा प्रभुत्व था और निश्चय ही वह हद पार करने वालों में से था।

    10:83
  10. وَقَالَ مُوسَىٰ يَا قَوْمِ إِنْ كُنْتُمْ آمَنْتُمْ بِاللَّهِ فَعَلَيْهِ تَوَكَّلُوا إِنْ كُنْتُمْ مُسْلِمِينَ

    और मूसा ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! यदि तुम अल्लाह पर ईमान लाए हो, तो उसी पर भरोसा करो, यदि तुम आज्ञाकारी हो।

    10:84
  11. فَقَالُوا عَلَى اللَّهِ تَوَكَّلْنَا رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ

    तो उन्होंने कहा : हमने अल्लाह ही पर भरोसा किया है। ऐ हमारे पालनहार! हमें अत्याचारी लोगों के लिए आज़माइश न बना।

    10:85
  12. وَنَجِّنَا بِرَحْمَتِكَ مِنَ الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ

    और हमें काफ़िर लोगों से अपनी रहमत से नजात दे।

    10:86
  13. وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ وَأَخِيهِ أَنْ تَبَوَّآ لِقَوْمِكُمَا بِمِصْرَ بُيُوتًا وَاجْعَلُوا بُيُوتَكُمْ قِبْلَةً وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ ۗ وَبَشِّرِ الْمُؤْمِنِينَ

    और हमने मूसा तथा उनके भाई (हारून) की ओर वह़्य भेजी कि अपनी जाति के लिए मिस्र में कुछ घरों को उपासनागृह नियत कर लो, और अपने घरों को क़िबले की तरफ़ बना लो, और नमाज़ क़ायम करो, और ईमान वालों को ख़ुशख़बरी दे दो।

    10:87
  14. وَقَالَ مُوسَىٰ رَبَّنَا إِنَّكَ آتَيْتَ فِرْعَوْنَ وَمَلَأَهُ زِينَةً وَأَمْوَالًا فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا رَبَّنَا لِيُضِلُّوا عَنْ سَبِيلِكَ ۖ رَبَّنَا اطْمِسْ عَلَىٰ أَمْوَالِهِمْ وَاشْدُدْ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ فَلَا يُؤْمِنُوا حَتَّىٰ يَرَوُا الْعَذَابَ الْأَلِيمَ

    और मूसा ने कहा : ऐ हमारे पालनहार! तूने फ़िरऔन और उसके सरदारों को सांसारिक जीवन में शोभा-सामग्री तथा धन-संपत्ति प्रदान की है, ऐ हमारे पालनहार! ताकि वे (लोगों को) तेरे मार्ग से भटकाएँ। ऐ मेरे पालनहार! उनके धनों को मिटा दे और उनके दिलों को कसकर बाँध दे, ताकि वे ईमान न लाएँ, यहाँ तक कि दर्दनाक अज़ाब देख लें।

    10:88
  15. قَالَ قَدْ أُجِيبَتْ دَعْوَتُكُمَا فَاسْتَقِيمَا وَلَا تَتَّبِعَانِّ سَبِيلَ الَّذِينَ لَا يَعْلَمُونَ

    अल्लाह ने कहा : निःसंदेह तुम दोनों की प्रार्थना स्वीकार कर ली गई। अतः तुम दोनों दृढ़ रहो और उन लोगों के मार्ग पर न चलो, जो नहीं जानते।

    10:89
  16. وَجَاوَزْنَا بِبَنِي إِسْرَائِيلَ الْبَحْرَ فَأَتْبَعَهُمْ فِرْعَوْنُ وَجُنُودُهُ بَغْيًا وَعَدْوًا ۖ حَتَّىٰ إِذَا أَدْرَكَهُ الْغَرَقُ قَالَ آمَنْتُ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا الَّذِي آمَنَتْ بِهِ بَنُو إِسْرَائِيلَ وَأَنَا مِنَ الْمُسْلِمِينَ

    और हमने बनी इसराईल को सागर पार करा दिया, तो फ़िरऔन और उसकी सेना ने सरकशी और ज़्यादती करते हुए उनका पीछा किया। यहाँ तक कि जब वह डूबने लगा, तो बोला : मैं ईमान ले आया कि निःसंदेह उसके सिवा कोई पूज्य नहीं, जिसपर बनी इसराईल ईमान लाए हैं और मैं आज्ञाकारियों में से हूँ।

    10:90
  17. آلْآنَ وَقَدْ عَصَيْتَ قَبْلُ وَكُنْتَ مِنَ الْمُفْسِدِينَ

    क्या अब? हालाँकि निःसंदेह तूने इससे पहले अवज्ञा की और तू बिगाड़ पैदा करने वालों में से था।

    10:91
  18. فَالْيَوْمَ نُنَجِّيكَ بِبَدَنِكَ لِتَكُونَ لِمَنْ خَلْفَكَ آيَةً ۚ وَإِنَّ كَثِيرًا مِنَ النَّاسِ عَنْ آيَاتِنَا لَغَافِلُونَ

    अतः आज हम तेरे शरीर को बचा लेंगे, ताकि तू अपने बाद आने वालों के लिए एक बड़ी निशानी बन जाए और निःसंदेह बहुत-से लोग हमारी निशानियों से निश्चय ग़ाफ़िल हैं।

    10:92

अनुवाद: अज़ीज़ुल हक़ अल-उमरी